विवादों में आमिर:लाल सिंह चड्ढा की शूटिंग के बाद लद्दाख के वाखा गांव को डंपिंग ग्राउंड बनाकर छोड़ आई टीम, फोटो आईं सामने

HomeCinema

विवादों में आमिर:लाल सिंह चड्ढा की शूटिंग के बाद लद्दाख के वाखा गांव को डंपिंग ग्राउंड बनाकर छोड़ आई टीम, फोटो आईं सामने

आमिर खान अपनी फिल्म 'लाल सिंह चड्ढा' की शूटिंग में व्यस्त हैं। वे इसे क्रिसमस पर रिलीज करन चाहते हैं। इसलिए वे इस समय लद्दाख में शूटिंग कर रहे हैं। हा

सुशांत सिंह राजपूत ने नहीं किया था सुसाइड | loopholes which show sushant singh rajput dint die by suicide
Coolie No 1 के Trailer को देखकर गोविंदा का हुआ बुरा हाल, दर्शकों ने वरुण की एक्टिंग के लिए कह दी ये बात
टॉयलेट में ऑफर हुआ था प्रेम चोपड़ा के दामाद शरमन जोशी को करियर का सबसे बड़ा रोल

आमिर खान अपनी फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ की शूटिंग में व्यस्त हैं। वे इसे क्रिसमस पर रिलीज करन चाहते हैं। इसलिए वे इस समय लद्दाख में शूटिंग कर रहे हैं। हालांकि फिल्म कि टीम विवादों में आ गई है। दरअसल लद्दाख के वाखा गांव से एक वीडियो सामने आया है जिसमे वहां फैले हुए कचरे को दिखाया गया है। ये वही जगह है जहां पिछले दिनों लाल सिंह चढ्ढा कि टीम ने शूटिंग की थी, और वहां से जाने के पहले कचरे का प्रॉपर ट्रीटमेंट नहीं किया।

एक यूजर ने सोशल मीडिया पर शूटिंग के बाद का एक वीडियो पोस्ट किया। जिससे पता चलता है कि गांव बुरी तरह प्रदूषित है और टीम हर जगह कचरा छोड़ रही है। वीडियो को जिग्मत लद्दाखी ने पोस्ट किया है और कैप्शन में लिखा है- ये तोहफा है बॉलीवुड स्टार आमिर खान की तरफ से लद्दाख के वाखा गांव वालों के लिए, जो फिल्म लाल सिंह चड्ढा की टीम छोड़ गई है। आमिर खान खुद सत्यमेव जयते में पर्यावरण की सफाई की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं लेकिन जब खुद की बात आती है तो ऐसा ही होता है।

एक और यूजर ने लिखा – लाल सिंह की शूटिंग लद्दाख के कारगिल जिले के वाखा गांव के पास सरुकाथांग में की जा रही है। सरुकाथांग इन दिनों एक डंपिंग ग्राउंड की तरह दिखता है जिसमें प्लास्टिक की बोतलें और कचरा बिखरा हुआ है। एक दूसरे यूज़र ने आमिर की फिल्म रंग दे बसंती के समय किये गए इसी तरह के व्यवहार के बारे में कमेंट किया है। उन्होंने लिखा- रंग दे बसंती 2006 में आई थी और उस फिल्म के बाद हमारा नाहरगढ़ वन्यजीव अभयारण्य बीयर की बोतलों से डंप यार्ड की तरह हो गया था। हमारी टीम ने सेंचुरी के 2 इलाकों से 3 टन टूटी बोतलें इकट्ठा की थीं।