बस पांच मिनट में समझिए श्रीराम की पांचों फिल्मों का तिलिस्म, हर फिल्म मील का पत्थर

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बस पांच मिनट में समझिए श्रीराम की पांचों फिल्मों का तिलिस्म, हर फिल्म मील का पत्थर

श्रीराम राघवन को अपराध कथाओं से खास लगाव है। टेलीविजन पर उन्होंने ‘आहट’ और ‘सीआईडी’ के तमाम एपिसोड्स लिखे हैं। स्टार बेस्ट सेलर की कहानी ‘फर्स्ट किल’ 

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श्रीराम राघवन को अपराध कथाओं से खास लगाव है। टेलीविजन पर उन्होंने ‘आहट’ और ‘सीआईडी’ के तमाम एपिसोड्स लिखे हैं। स्टार बेस्ट सेलर की कहानी ‘फर्स्ट किल’ और उससे पहले रघुवीर यादव के साथ बनाई अपनी डॉक्यूफिक्शन ‘रमन राघव’ के निर्देशन से उन्होंने  फिल्ममेकर रामगोपाल वर्मा का ध्यान अपनी तरफ खींचा। रामगोपाल वर्मा के साथ श्रीराम ने लंबा वक्त बिताया और तब जाकर उन्हें मौका मिला अपनी पहली फिल्म ‘एक हसीना थी’ बनाने का। ये फिल्म अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर के करियर की बेहतरीन फिल्म मानी जाती है। इसमें उर्मिला ने एक ऐसी प्रेमिका का रोल निभाया जिसे उसका प्रेमी धोखे से जेल पहुंचा देता है। जेल से छूटने के बाद वह कैसे उससे योजनाबद्ध तरीके से बदला लेती है और कैसे उसका अंत करती है, इसे बहुत ही रोचक तरीके से श्रीराम ने इस फिल्म में दर्शाया है। ये पहली फिल्म है जिसमें अभिनेता सैफ अली खान ने निगेटिव किरदार निभाया और खूब वाहवाही लूटी।

श्रीराम राघवन की दूसरी फिल्म ‘जॉनी गद्दार’ साल 2007 में रिलीज हुई। हिंदी सिनेमा में अपनी तरह की ये भी एक अनोखी फिल्म रही। मशहूर गायक मुकेश के पौत्र व गायक नितिन मुकेश के पुत्र नील नितिन मुकेश की ये डेब्यू फिल्म है। फिल्म में धर्मेंद्र, जाकिर हुसैन, विनय पाठक, गोविंद नामदेव, दयानंद शेट्टी, अश्विनी कलसेकर के अलावा रिमी सेन भी एक खास भूमिका में हैं। श्रीराम फ्रेंच सिनेमा से काफी प्रभावित रहे हैं। इस फिल्म में भी वह ‘सिम्फनी पोर उन मैसेकर’ से प्रेरित दिखते हैं। इस फिल्म की पटकथा ही इसकी जान है।

सैफ अली खान ने श्रीराम राघवन के टैलेंट को अपनी फिल्म ‘एक हसीना थी’ में ही पहचान लिया। वह फिल्म निर्माता बने तो उन्होंने श्रीराम को ही फिल्म ‘एजेंट विनोद’ निर्देशित करने के लिए साइन किया। करीना कपूर फिल्म की हीरोइन बनीं, लेकिन श्रीराम राघवन ने इस फिल्म में अपने करियर में पहली बार वह सब कुछ किया जो फिल्म के हीरो सैफ अली खान चाहते थे। श्रीराम मानते भी हैं कि वह इस फिल्म की मेकिंग के दौरान भावनाओं में बह गए थे। सलमान खान के ‘टाइगर’ बनने से पहले सैफ अली खान इस फिल्म में रॉ के एजेंट बने थे। जासूसी दुनिया के भीतर की कहानी कहने की कोशिश करती फिल्म ‘एजेंट विनोद’ बहुत बड़े बजट की फिल्म थी और दिखावा श्रीराम राघवन की फितरत में ही शामिल नहीं है।

साल 2015 में रिलीज हुई फिल्म ‘बदलापुर’ ने श्रीराम राघवन को फिर एक बार हिंदी सिनेमा के चोटी के निर्देशकों में ला खड़ा किया। इटालियन उपन्यास ‘डेथ्स डार्क एबिस’ पर बनी ये फिल्म वरुण धवन को सितारों की पहली कतार में आगे लाने करने में सफल रही। वरुण धवन को इसी फिल्म के बाद गंभीर अभिनेता भी माना गया हालांकि अपनी बाद की फिल्मों से वरुण ने खुद ही इस ब्रांडिंग को पलीता लगा दिया। वरुण का किरदार रघु इस फिल्म में अपनी पत्नी और बेटे की मौत के जिम्मेदार दो बैंक लुटेरों के पीछे लगा हुआ है। एक प्राइवेट जासूस की मदद से वह मुख्य लुटेरे लियाक की गर्लफ्रेंड तक पहुंचता है। लियाक का पार्टनर बैंक लूट के पैसे लेकर कहीं अलग रह रहा है। जिस तरह श्रीराम ने सैफ अली खान को ‘एक हसीना थी’ में उनकी इमेज के बिल्कुल विपरीत परदे पर पेश किया था, वही काम यहां उन्होंने वरुण धवन के साथ किया। फिल्म सुपरहिट रही और श्रीराम एक बार फिर रातोंरात हिंदी सिनेमा के सबसे पसंदीदा निर्देशक बन गए।

श्रीराम राघवन की पिछली फिल्म रही ‘अंधाधुन’। साल 2018 में रिलीज हुई इस फिल्म में भी श्रीराम की इच्छा वरुण धवन को ही पियानोवादक बनाने की थी, लेकिन वरुण धवन को लगा कि अब तो वह सुपरस्टार बन चुके हैं। उन्होंने ये फिल्म करने से मना कर दिया। आयुष्मान खुराना को इसका पता चला तो उन्होंने श्रीराम के मोबाइल नंबर पर मैसेज भेजा कि वह इस फिल्म के लिए ऑडीशन देना चाहते हैं। ऑडीशन सफल रहा। आयुष्मान की इस किरदार के लिए लंबी ट्रेनिंग चली। कहानी एक ऐसे पियानोवादक की है जो अंधा बनकर लोगों की सहानुभूति लूटता है। और, इसी चक्कर में एक कत्ल का चश्मदीद बन जाता है। इस फ़िल्म में तब्बू ने एक्टिंग का शानदार नमूना पेश किया है। ये फिल्म भी एक फ्रेंच फिल्म से प्रेरित है। इस फिल्म को सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समेत ढेरों पुरस्कार मिले। श्रीराम राघवन को भी खूब इनाम इस फिल्म ने दिलाए। इस फिल्म के निर्माता संजय राउतरे के साथ ही श्रीराम अपनी अगली फिल्म ‘मेरी क्रिसमस’ बना रहे हैं।